फ़िल्म की कहानी एक मध्यम वर्गीय अभावग्रस्त परिवार की कहानी है। जैसा किसी भी आम आदमी का होता है। वरुण धवन ‘मौजी‘ के अहम किरदार में है जो कि अपनी जीविका और पारिवारिक जिम्मेदारीयों के वहन के लिए एक दुकान पर नौकरी करते है लेकिन दुकान के मालिकों का व्यहवार उनके प्रति उपयुक्त नहीं होता है। जो कि मौजी की पत्नी ममता(अनुष्का शर्मा)

को हरगिज बर्दाश्त नहीं होता और वह मौजी को अपना हुनर इस्तेमाल करने के लिये प्रेरित करती है। जिस तरह रामायण में हनुमान जी को अपनी शक्तियों का अहसास जामवंत के याद दिलाने पर होता है, उसी तरह मौजी को भी ममता के प्रेरित करने पर अपने हुनर का अहसास होता है। रघुवीर यादव मौजी के पिता के किरदार में प्रशंसनीय है उसी के साथ यामिनी दास को माँ के किरदार में देखना सुखद लगता है, और दोनों किरदार आप का मन जीत लेेते है। फ़िल्म के सभी सहायक किरदार बहुत ही जबरदस्त है और फ़िल्म को मजबूत आधार प्रदान करते है। वरूण और अनुष्का ने भी अपने तड़क-भड़क और आकर्षित करने वाले किरदारों से अलग, आम आदमी की तरह अपने आप को प्रदर्शित किया है, और कामयाब भी रहे हैं। अभिनय की बात करें तो सब ने अच्छा अभिनय किया हैै। फ़िल्म की कहानी बहुत ही सरल है जो कि उस का मजबूत और कामजोर पक्ष दोनों ही हैै। फिल्म के संवाद अच्छे हैं लेेेकिन करारेेेपन का अभाव लगता है। एक सीधी- सादी पारिवारिक फ़िल्म है, अच्छे अभिनय के साथ जिसे बहुत सादगी से प्रस्तुत किया गया है। बहुत ही साफ़ तौर पर कोई संदेश तो यह फ़िल्म नहीं देती है लेकिन हाँ यह जरूर कहती है…सपनें पूरे करने का अगर एक मौका मिले तो उस बारिश में छाता लेकर जाने की जरूरत नहीं है थोड़ा सा तो भीगना बनता है 😊 ‘बाकी सब बढ़िया है’ ।।।