Mission Mangal – पूरी दुनिया से कहो Copy That !!!


मिशन मंगल फ़िल्म समीक्षा (Movie Review)
3.5 / 5
मिशन मंगल… निर्देेेशक जगन शक्ति अपनी प्रथम फ़िल्म के साथ थियेटर पर क़दम रख चुके हैं, और उनका ये क़दम मंगलकारी भी प्रतीत  होता नजर आ रहा है। जिस प्रकार भारत अपने मार्स प्रोजेक्ट में प्रथम प्रयास में ही सफल हुआ था, उसी तरह से जगन शक्ति भी अपनी पहली ही फ़िल्म से दर्शकों के दिलों पर छाप छोड़ने में सफल हुए हैं। उस पर 15 अगस्त का तड़का, जब देश-प्रेम के जज्बात पूरे चरम पर होते हैं।
फ़िल्म की कहानी को आर.बाल्की, निधि सिंह धर्मा और साकेत कोडिंपर्थी ने लिखा है। फ़िल्म इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन(इसरो) के मार्स ऑर्बिटर मिशन पर आधारित है।
यह मिशन सबसे सस्ते interplanetary missions में से एक है जो कि 4.5बिलियन की लागत में सम्पूर्ण हुआ था।
फ़िल्म की बात करे तो, फ़िल्म में सभी तत्वों का समावेश है। सच्ची घटना में बॉलीवुड का तड़का है लेकिन वह आप को मूल उद्देश्य से भटकता नहीं है बल्कि थोड़ा दिलचस्प ही बना देता है, आखिरकार आये तो फ़िल्म देखने ही है ना..😊।
फ़िल्म में अक्षय कुमार(साइंटिस्ट राकेश धवन) और विद्या बालन(प्रोजेक्ट डायरेक्ट तारा शिंदे) मुख्य भूमिका में हैै जोकि अपने एक मिशन के फेल होने पर दंड-स्वरूप मिशन मंगल पर लगा दिए जाते हैं। दोनों ही कलाकार अपने अपने किरदार मेंं बहुुुत सहज है और बड़े ही वास्तविक लगते हैं। इसी के साथ सोनाक्षी सिन्हा, तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हरी, शरमन जोशी, नित्या मेनन, संजय कपूर, जीशान आयूब..इन सभी का किरदार भी कहानी की मांग के अनुसार इस तरह से बिठाया गया है कि आप देखते देखते उन से खुद-ब-खुद जुडतेे चले जाते हैं। फ़िल्म का स्क्रीन प्ले, बैकग्राउंड स्कोर, डायरेक्शन सराहनीय है। वी एफ एक्स इफेक्टस फिल्म का कमजोर पक्ष है, जिसकी वजह से space केे दृश्य उतने वास्तविक नही लग पाते हैं, लेकिन emotion quiescent एकदम बराबर है।
फ़िल्म जो बताना चहाती है, जो दिखाना चहाती है, उसमें वो कहीं भी नहीं चूकती है। इस स्वंत्रता दिवस के अवसर पर मिशन मंगल के साथ फिर उस गौरवमय क्षण को महसूस किया जा सकता है, “जब हम विशव में मंगल पर पहुुँचने वाला प्रथम देेेश बने थे।”

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