Saina… ( Saina Nehwal)

निर्देशक – अमोल गुप्ते

लेखक अमोल गुप्ते, अमितोश नागपाल 

अवधि-  2 घंटा  15 मिनट

OTT Amazon Prime
⭐⭐⭐ 3/5

“मांगने वाली चीज नहीं

ये मौका उसका जिसने छीना…”

जिंदगी की सबसे बड़ी विशेषता और विडंबना यह है कि वह परियों की कहानी की तरह नहीं होती है। यहां सब कुछ पाने के लिए आपका हुनर और कड़ी मेहनत ही आपका सबसे बड़ा शस्त्र होता है।निर्देशक अमोल गुप्ते की फिल्म साइना जो विश्व की नंबर वन बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुकी साइना नेहवाल की बायोपिक है। विश्व में नंबर एक का खिताब हासिल करना कोई आसान कार्य नहीं होता है और यह कितना मेहनत से भरा होता है, वह यह फिल्म हमें बताने की कोशिश करती है। जिंदगी में एक ऐसा मुकाम पाना जहां पर खड़े होकर आप कितनों की प्रेरणा का सबब बन सकते हैं, वहां तक जाने की डगर पर काफी कुछ निर्भर करता है। फिल्म साइना बहुत सी बातों की महत्वता को दर्शाती है, जिसमें से मुख्य हैं…

  • आशावादी माता पिता !
  • सही दिशा और फोकस की आवश्यकता !
  • दिशा निर्धारकों व गुरुओं का योगदान !
  • सही दिशा में सही कदम !
  • लक्ष्य प्राप्ति के लिए मेहनत का साथ !

यदि आपकी जिंदगी में प्रेरणा की कमी महसूस हो रही है तो आप को यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए क्योंकि यह आपको थोड़ा उछाल तो अवश्य ही दे सकती है। कुछ Dialogue जो सच में प्रेरणादायक है…

  • मेरा ध्येय एकदम सरल… सामने वाले को मात देना ।
  • रास्ते पर चलना एक बात है साइना… और रास्ते बनाना दूसरी बात है… तू ना बेटा वो दूसरी बात करने की सोच ।
  • Game जीतने के लिए तुम क्या करते हो वो important नहीं है… important है कि game जीतने के लिए तुम क्या छोड़ते हो ।
  • मुझे वो champion नहीं चाहिए जो मन में जीत के बारे में सोचते हैं… मुझे वो champion चाहिए जो जीत के अलावा और कुछ नहीं सोचता है।

फिल्म बहुत ही सरलता से अपनी बात को कहती है, जो कि फिल्म की खास और आम दोनों ही बात है। जो आसान लगे वह लोगों को मामूली भी लग सकता है, तो यहां भी यही मतभेद है किंतु जिंदगी तो सहज और सरल की होती है। वो तो आपके कार्य होते हैं जो उसको फिल्म बनाने योग्य और लोगों को प्रेरणा देने लायक बनाते हैं। तो निर्देशक अमोल गुप्ते ने उस सहजता को बरकरार रखते हुए साइना नेहवाल के उन कार्य को दिखाने का प्रयत्न किया है जो उनको नंबर 1 के शिखर तक लेकर गए थे। किसी भी खिलाड़ी केेे जीवन पर फिल्म बनानाा कोई आसान कार्य नहीं है क्योंकि उसके लिए कलाकारों का सही चुनाव सबसे दुर्लभ और अहम कड़ी बन जाती हैै । यहां हम अभिनय की बात करें तो नयशा कौर भटोये, परिणीति चोपड़ा, मेघना मलिक और मानव कौल काफी प्रशंसनीय है।

कुछ लोगों के जीवन के बारे में जानना बहुत महत्वपूर्ण और सुखद होता है कहने का तात्पर्य है कि आपको यह फिल्म एक बार अवश्य ही देखनी चाहिए और अपनी प्रतिक्रिया को भी मुझ तक जरूर पहुंचाएं 😊।

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