महारानी सीरीज समीक्षा
निर्देशक – करण शर्मा
कलाकार – हुमा कुरैशी, सोहम शाह, अमित सियाल, प्रमोद पाठक, अतुल तिवारी और कनी कुश्रुति …
प्रस्तुतकर्ता SonyLIV
⭐⭐⭐⭐
” कोयले की दलाली में हाथ काले “
अब आप कोयले के व्यापार में हों और आपके हाथ काले ना हों यह तो नामुमकिन सी बात है। अब राजनीति भी कोयले की दलाली स्वरूप कार्य ही है अगर आप उस में उतरे हैं तो जितनी बड़ी आपकी महत्वाकांक्षा होगी उतने ही अधिक अपयश के छींटे आपके दामन पर आएंगे।
बीते शुक्रवार (28 मई) को सोनी लिव पर एक नया सियासी ड्रामा आया है महारानी ,यह उसी की प्रस्तावना थी।
महारानी कहानी है, बिहार की राजनीति की।बिहार की राजनीति और वह भी 90 के दशक की। जी हां, आप जो सोच रहे हैं कहानी वहीं से प्रेरित है किंतु कहानी उनकी नहीं है। बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा बदलाव 90 के दशक में ही आया था। महारानी उसी बदलाव को और जातीय समीकरण की राजनीति को अपने ढंग में प्रस्तुत करती है।
राजनीति अपने आप में एक उलझा हुआ और दांवपेच से भरा हुआ विषय है और इससे जुड़ी हुई कोई भी सीरीज या फिल्म यदि सही ढंग से और पूर्ण सतर्कता से बनाई गई हो तो वह अपने आप ही दिलचस्प हो जाती है।
महारानी की कहानी की बात करें तो जैसे इसके नाम से ही प्रतीत हो जाता है कि नारी चरित्र को केंद्र में रखा गया है। कहानी केंद्रित तो रानी भारती के ऊपर ही है किंतु बाकी राजनीतिक पक्षों और किरदारों का समीकरण भी काफी घुमावदार और देखने योग्य है।बिहार के मुख्यमंत्री भीमा भारती के ऊपर जानलेवा हमला होता है जिसके चलते वह अपनी सत्ता को बचाने के लिए अपनी चौथी पास पत्नी को मुख्यमंत्री बना देते हैं, यह सोच कर कि वह कागजी मुख्यमंत्री बनीं रहेंगी और बाकी राजनीति हम चलाएंगे किंतु परेशानी तब होती है जब यह गूंगी गुड़िया बोलने और अपने फैसले लेने लग जाती है। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के नेता नवीन कुमार, जो कि भूतपूर्व मुख्यमंत्री के पुराने मित्र हैं और उनकी पार्टी के युवा नेता भी रह चुके हैं, इस नई साहिब – बीवी सरकार को गिराने की पूरी कोशिश में हैं और हर यथासंभव प्रयास भी कर रहे हैं। 90 के दशक की बिहार की राजनीति की मुख्य घटनाओं को भी दर्शाया गया है ,जिसमें चारा घोटाला और लक्ष्मणपुर व बाथे नरसंहार शामिल है।
महारानी में देखने योग्य क्या है ??
- निर्देशन काफी उम्दा है और प्रस्तुत करने का ढंग भी रुचिकर है।
- कहानी को यथार्थवादी रखा गया है और प्रस्तुतीकरण भी वैसा ही है।
- किरदारों का चयन काफी सटीक और न्याय पूर्ण है।
- सभी किरदारों को मात्रा अनुसार प्रयोग किया गया है जोकि प्रशंसनीय है।
- सभी कलाकारों का अभिनय सीरीज की सबसे मजबूत कड़ी है।
महारानी में जो सबसे ज्यादा खटकता है, वह है इसकी अवधि जो कुल मिलाकर 450 मिनट बनती है। जो 10 कड़ियों में विभाजित है, इसकी वजह से सीरीज काफी धीरे धीरे चलती हुई प्रतीत होती है। संभवत: 2 कड़ियां तो आराम से कम हो सकती थी।
अभिनय की बात करें तो सभी कलाकारों ने अपना कार्य बहुत ही बारीकी और ईमानदारी से किया है और सभी प्रशंसा के पात्र भी हैं किंतु फिर भी यह 4 नाम मेरे अनुसार अधिक प्रशंसा के योग्य हैं।
हुमा कुरैशी,सोहम शाह,अमित सियाल,कनी कुश्रुति
यदि आप लोगों की रुचि राजनीति में है और आप उसके दांवपेच को समझना और देखना पसंद करते हैं तो यह सीरीज आप ही के लिए है। यह आपके दिमाग को थोड़े समय के लिए काम पर लगा सकती है और आप इसको देखना काफी पसंद भी करेंगें।
तो फिर देखिए और आपको यह सीरीज कैसी लगी वह कमेंट बॉक्स में बताइए 😊😊।