पीहू फ़िल्म समीक्षा ( Pihu Movie Review)
पीहू फ़िल्म समीक्षा ( Pihu Movie Review)
हेलीकॉप्टर ईला फ़िल्म समीक्षा ( Helicopter Eela Movie review)
3*/5*
“चंदा है तू,मेरा सूरज है तू
इस गाने को सुन कर जो बात दिमाग में आती है, वो है ‘माँ’ और उसकी पूरी दुनिया, उस का ‘बेटा’। प्रदीप सरकार की फ़िल्म हेलीकॉप्टर ईला भी माँ-बेटे के इसी रिश्ते की तर्ज पर बनी है। फ़िल्म की कहानी आंनद गांधी के गुजराती नाटक बेटा कगड़ो पर आधारित है। फ़िल्म की कहानी को आंनद गांधी ने मितेश शाह के साथ मिलकर लिखा है।

फ़िल्म की कमजोर कड़ी, फ़िल्म की कहानी है, जोकि निःसंदेह अच्छी हो सकती थी। फ़िल्म का अंत जो थोड़ा और अलग दिखाया जा सकता था और इसी के साथ अगर फ़िल्म की लंबाई, जो थोड़ी और कम होती तो फ़िल्म और भी असरदार लगती। लेकिन अगर आप काजोल फैन है, तो फिर ये फ़िल्म देखना तो बनता है और वो आप को १०० फिसदी निराश नहीं करेगी 😊😊।।

अंधाधुन फ़िल्म समीक्षा (Andhadhun Movie Review)
3.5*/5*
हर फ़िल्म का एक दर्शक वर्ग होता है, कहने का तात्पर्य यह है कि कुछ कॉमेडी फिल्मों को पसंद करते हैंं, तो कुुुछ रोमांटिक, तो कुछ थ्रिलर और अगर आप थ्रिलर फिल्मों के शौकीन है तो अंधाधुन आप के लिये बना बनाया पैकेज है। जोकि आपको थ्रिलर और सस्पेंस दोनों का पूरा मसाला प्रदान करती है। फ़िल्म का निर्देशन श्री राम राघवन ने किया है जोकि इस तरह की फिल्में बनाने में ख्याति प्राप्त कर चुके हैं। इस से पेेहले उनकी फ़िल्म बदलापुर(2015) एक क्राइम थ्रिलर थी। जिसे भी काफी पसंद किया गया था।
फ़िल्म की कहानी एक मध्यम वर्गीय अभावग्रस्त परिवार की कहानी है। जैसा किसी भी आम आदमी का होता है। वरुण धवन ‘मौजी‘ के अहम किरदार में है जो कि अपनी जीविका और पारिवारिक जिम्मेदारीयों के वहन के लिए एक दुकान पर नौकरी करते है लेकिन दुकान के मालिकों का व्यहवार उनके प्रति उपयुक्त नहीं होता है। जो कि मौजी की पत्नी ममता(अनुष्का शर्मा)

को हरगिज बर्दाश्त नहीं होता और वह मौजी को अपना हुनर इस्तेमाल करने के लिये प्रेरित करती है। जिस तरह रामायण में हनुमान जी को अपनी शक्तियों का अहसास जामवंत के याद दिलाने पर होता है, उसी तरह मौजी को भी ममता के प्रेरित करने पर अपने हुनर का अहसास होता है। रघुवीर यादव मौजी के पिता के किरदार में प्रशंसनीय है उसी के साथ यामिनी दास को माँ के किरदार में देखना सुखद लगता है, और दोनों किरदार आप का मन जीत लेेते है। फ़िल्म के सभी सहायक किरदार बहुत ही जबरदस्त है और फ़िल्म को मजबूत आधार प्रदान करते है। वरूण और अनुष्का ने भी अपने तड़क-भड़क और आकर्षित करने वाले किरदारों से अलग, आम आदमी की तरह अपने आप को प्रदर्शित किया है, और कामयाब भी रहे हैं। अभिनय की बात करें तो सब ने अच्छा अभिनय किया हैै। फ़िल्म की कहानी बहुत ही सरल है जो कि उस का मजबूत और कामजोर पक्ष दोनों ही हैै। फिल्म के संवाद अच्छे हैं लेेेकिन करारेेेपन का अभाव लगता है। एक सीधी- सादी पारिवारिक फ़िल्म है, अच्छे अभिनय के साथ जिसे बहुत सादगी से प्रस्तुत किया गया है। बहुत ही साफ़ तौर पर कोई संदेश तो यह फ़िल्म नहीं देती है लेकिन हाँ यह जरूर कहती है…सपनें पूरे करने का अगर एक मौका मिले तो उस बारिश में छाता लेकर जाने की जरूरत नहीं है थोड़ा सा तो भीगना बनता है 😊 ‘बाकी सब बढ़िया है’ ।।।

मंटो समीक्षा (Manto Review)
मनमर्ज़ीयाँ समीक्षा (Manmarziyan Review)
कहानी की बात करें तो यह एक प्रेम त्रिकोण (Love triangle) है। जो विकी(विकी कौशल),रुमी(तापसी पन्नू) और रॉबी(अभिषेक बच्चन)के मध्य दिखाया गया है। कहानी वैसी ही है जैसी की हम लोग प्रेम त्रिकोण(Love triangle)के बारे में सोचते हैं। अलग है तो कहानी कहने का तरीका, उस को प्रस्तुत करने का अनुठा ढंग। रूमी और विकी एकदूसरे के लिये पागल हैं वो एकदूसरे को पागलों की तरह ‘फ्यार’ करते हैं, जो कि इस पीढ़ी का प्यार है। जिनके लिए प्यार और फ्यार का अंतर खत्म हो चुका है। जब इनके इस फ्यार की खबर रुमी के घरवालों को लगती है तो फ़िल्म में किरदार जुडता है रॉबी का जो करता है, रुमी से प्यार। यह फ़िल्म प्यार और फ्यार का सफ़र है और अंतरात्मा की जंग।
अनुराग कश्यप के इस प्यार और फ्यार की रोलर कोस्टर यात्रा का मजा लेने के लिए थियेटर का रुख पूरी तरह से किया जा सकता है और इस ग्रे वाले शेड को अपनी जिंदगी में भी थोड़ा सा तो भरा ही जा सकता है। 😊😊

3.5*/5*
निर्देशक ‘अमर कौशिक’ ने इस फ़िल्म के साथ निर्देशन में अपना प्रथम क़दम रख दिया हैं। इस से पहले वह सहायक निर्देशक के तौर पर काफी फिल्मों में काम कर चुके हैं। इस फ़िल्म से पहले फ़िल्म ‘अब्बा(2017)‘ प्रमुख निर्देशक के तौर पर उनकी प्रथम फ़िल्म थी लेकिन वह एक शॉर्ट फ़िल्म थी जिसे ‘टोरंटो इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल‘ में काफी सराहना मिली थी।

‘टोबा टेक सिंह‘ फ़िल्म ‘मंटो’ की लघु कथाओं(short stories) में से एक कथा ‘टोबा टेक सिंह‘ पर आधारित हैं। यहाँ मैं एक बात और जोड़ना चाहूँगी अगर आप भारत या फिर पाकिस्तान से हैं और आप ‘सआदत हसन मंटो’ को नहीं जानते तो आप एक बहुत ही निर्भीक और बेबाक़ शख्सियत को नहीं जानते जो कि अपने बेबाक़ और स्पष्ट लेखन के लिए दोनो देशों में जानी जाती है। ‘मंटो’ का जन्म ब्रिटिश इंडिया में हुआ था और विभाजन के बाद वो पाकिस्तान का हिस्सा थे।
हैप्पी फिर भाग जाएगी समीक्षा ( Review )

गोल्ड समीक्षा (Gold Review)

3* / 5*