Shakuntala Devi : Amazing Woman !!!

शकुंतला देवी फ़िल्म समीक्षा (Movie Review)
3*/5*
” मैं बड़ी होकर एक बहुत बड़ी औरत बनूंगी ।”
कुछ लोगों का जन्म चर्चा में रहने के लिए ही होता है और वे जहां भी जाते है प्रसिद्धि उनके साथ साथ चलती है और वह सब उनकी प्रतिभा की वज़ह से। अब चाहे वो प्रतिभा कड़ी मेहनत कर के प्राप्त की गई हो या फिर भगवान कि देन यानी की God Gifted हो।
शकुंतला देवी भी उन्ही लोगों मेंं से एक थी और प्रतिभा की धनी भी। उनकी गणित के कठिन सवालोंं को पलक झपकते ही हल कर देने की प्रतिभा अतुलनीय थी और उनकी इस क्षमता का पता उनके पिता को बचपन में ही चल गया था, जिसे उन्होंने अभ्यास से निरंतर सुधारा। शकुंतला देवी का जन्म 4 नवंबर 1929 में बेंगलुरु में हुआ था। वे बचपन से ही बहुत निडर थी और अपनी बात को बिना किसी झिझक सबकेे सामने स्पष्ट रूप से रखती थी। उनकी कहानी और शख्सियत नारीवाद ( Feminism) शब्द का सही उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। वह एक  आत्मनिर्भर महिला थी जो किसी भी कार्य में अपने आप को किसी से भी पीछे नहीं समझती थी। 
फिल्म को शकुंतला देवी की बेटी अनुपमा बनर्जी के नजरिए से प्रस्तुत किया गया है जिसके चलते उनका विश्व प्रसिद्ध गणितज्ञ होने के साथ साथ उनके पारिवारिक रिश्तों को भी बखूबी प्रस्तुत किया गया है। फिल्म में 1950 और 1960 के दशक को प्रभावित ढंग से पर्दे पर उतारा गया है और शकुंतलाा देवी के गौरवपूर्ण क्षणों को भी पूर्ण ईमानदारी से दर्शाया गया है। फिल्म की नींव विद्या बालन की मजबूत और सुलझी हुई अभिनय क्षमता है, वह किसी भी किरदार में इतनी सरलता से समा जाती हैं कि आप उस किरदार में किसी भी अन्य कलाकार को रख ही नहीं सकते और यहां भी उन्होंने अपनी वही छाप बरकरार रखी है। उनके अलावा अमित साध का अभिनय भी काफी परिपक्व है और छोटा किरदार होने केे बावजूद अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। जिशु सेनगुप्ता ने शकुंतला देवी केे पति का किरदार निभाया है और किरदार के साथ पूर्ण न्याय किया है। सान्या मल्होत्रा बेटी के किरदार में इतनी प्रभावी नहीं लगी है और थोड़ी over acting करती प्रतीत होती हैं। कहानी कहने का ढंग काफी असरदार नहीं है  और कमज़ोर कड़ी साबित होता है। इशिता मोइत्रा के हिंदी संंवाद भी उतने दमदार नहीं है किंतु इसको दक्षिण भारतीय झलक के चलते अनदेखा किया जा सकता है। कुल मिला कर निर्देशक अनु मेनन की फिल्म को एक बार अवश्य देखा जा सकता है और अपना नाम Guinness Book of Records में दर्ज कराने वाली महिला शकुंतला देवी जिनको Human Computer की उपाधि से सम्मानित किया गया था को करीब से जाना जा सकता है।
इसी के साथ फिल्म ये भी बताती है कि
” अपने सपनों को पहचान कर उन पर पूर्ण ईमानदारी से कार्य करना चाहिए। “