2.0 फ़िल्म समीक्षा (2.0 Movie Review )
3.5*/5*
निर्देशक
“शंकर“ की फ़िल्म
“2.0“ एक साइंस-फिक्शन है। 2010 में आयी रोबोट भी
“शंकर“ के द्वारा ही बनाई गयी थी और वह भी एक साइंस-फिक्शन ही थी।
“2.0“ को बहुत ही उम्दा तरीके से बनाया गया है। निर्देशक एक बात को लेकर काफी स्पष्ट (clear) थे कि उन को क्या दिखाना है। फ़िल्म का 3D बहुत ही बेहतरीन है। यहाँ मैं ये कह सकती हूँ कि अब तक की बनी भारतीय 3D फिल्मों में से यहाँ इस तकनीक का इस्तेमाल सबसे सर्वश्रेष्ठ तरीके से किया गया है। फ़िल्म के ग्राफिक्स कमाल के है।
“2.0“ में 300 तकनीशियनों ने काम किया हैै और वह फ़िल्म देख कर समझ आ जाता है।
“2.0″ की अवधि 147 मिनट है लेकिन यह लंबी और बोर करती हुई नहीं लगती है। फिल्म देखते हुए कई बार एक हॉलीवुड फ़िल्म देेेखने का एहसास होता है वो इसलिए क्योंकि तकनीकी करामात उसी दर्जे की दिखाई गयी है। फ़िल्म में आपको VFX, स्पेशल इफ़ेक्ट एकदम उत्तम(perfect) मिलेंगे लेकिन अगर आप कहानी ढूढ़ने बैठोगे तो थोड़ी निराशा हाथ लगेगी, वहाँ फ़िल्म थोडी चूक जाती है। फ़िल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि Technology जिस तरह से हमारे लिये सबकुछ हो गई है वो कहीं न कहीं हमारे पर्यावरण के लिए सही नहीं है और यह बात हम जितना जल्दी समझ जायेंगे हमारे लिए अच्छा होगा।
अब ये फ़िल्म “रजनीकांत“ की है और जिस फ़िल्म में वो होते है वहाँ कोई और कहाँ नजर आता है, ये तो हम रोबोट फ़िल्म मेंं भी देेेख चुके है और उनके अभिनय के बारे में कुछ बोलना मतलब ” सूरज को दीपक दिखाना ” वाली बात हो जायेगी 😊। अब बात करते है फ़िल्म के विलन “अक्षय कुमार“ की, मुझे फ़िल्म में वो कहीं नजर नहीं आये, नजर आया तो एक सशक्त विलन जो पूरी ईमानदारी से हीरो को हर तरह से टक्कर देता हुआ दिखा और ये एक अभिनेता के रूप में “अक्षय” की जीत है। फ़िल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है जो “ए.आर. रहमान“ द्वारा दिया गया है। इसी के साथ “एमी जैक्सन“ भी नजर आती है और अपने रोल को अच्छे से अदा करती दिखी हैै। “2.0“ एक मनोरंजक फ़िल्म हैै और आप बिना किसी शंका के देखने जा सकते है और आप बोर नहीं होंगे ये मुझे पूरा यकीन है😊।