डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे फिल्म समीक्षा Movie Review

  • निर्देशक – अलंकृता श्रीवास्तव
  • कलाकार – कोंकणा सेन शर्मा, भूमि पेडनेकर
  • अवधी – २ घंटे
  • प्रस्तुतकर्ता – नेटफ्लिक्स
  • ⭐⭐⭐
जब आपके दिमाग में बहुत सारे विचार हो और आप उन विचारों को एक-एक करके नहीं एक साथ ही शक्ल देने का प्रयास करते हैं तो जो अंत में जो परिणाम आता है, उसको हम डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे भी कह सकते हैं। निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ के 3 साल बाद अपनी नई फिल्म के साथ फिर से महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को उजागर कर रही हैं।
Why should boys have all the fun की तान पर बनी फ़िल्म, की हम औरतें क्या पीछे हैं। तो फ़िल्म की कहानी औरतों की अधूरी इच्छाओं की है लेकिन इसके लिए उनको कन्फ्यूज्ड दिखाना कहां तक सही है ??

कहानी कहने का जो तरीका है वह भी कंफ्यूज है और डॉली और किट्टी दोनों के किरदार भी उलझे हुए हैं। दोनों किरदार चचेरी बहनों के रिश्ते में है कोंकणा और भूमि बहनों के किरदार में काफी सहज व विश्वसनीय हैं लेकिन उनके किरदारों को पता ही नहीं है कि उन्हें जिंदगी से क्या चाहिए है।

डॉली अपनी शादी में संतुष्ट नहीं है, लेकिन खुश दिखने का ढोंग करती रहती है और डिलीवरी ब्वॉय उस्मान के रूप में आंतरिक खुशी ढूंढती रहती है और वहीं दूसरी तरफ किट्टी कम पढ़ी-लिखी है और गांव से शहर आकर एडल्ट कॉल सेंटर में काम करने लगती हैं, और अपने आप को शहर के परिवेश में ढालने का पुरजोर प्रयास करती है।
फिल्में में बहुत कुछ एक साथ दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। जिसके चलते बहुत सारी चीजें अधूरी लगती हैं और जब फिल्म समाप्त होती है तो संतुष्टि का अहसास नहीं देती और ना ही आपको यह लगता है कि आप कुछ अर्थपूर्ण देख रहे थे।
फिल्म की शुरुआत अच्छी है लेकिन अंत सभी प्रश्नों का उत्तर सफलतापूर्वक नहीं दे पाता है फिल्म में काफी कलाकार है और सभी अभिनय के लिहाज से काफी अच्छे साबित हुए हैं लेकिन सभी किरदारों को उनकी पूरी जगह सही से नहीं मिल पाई है। उसमें अमीर बशीर, विक्रांत मेसी अमोल पाराशर, करण कुंद्रा और कुब्रा सैत जैसे नाम शामिल हैं।
फिल्म को बिना शक एक बार जरूर देखा जा सकता है तो जाकर देखें और अपने विचार व्यक्त कीजिए।