
3* / 5*
धड़क समीक्षा ( Dhadak Review )
शशांक खेतान एक बार फिर अपनी बहु चर्चित फ़िल्म ‘धड़क’ के साथ बॉक्स ऑफिस पर है। इससे पहले वो अपनी दो फिल्मों ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनियां’ और ‘बद्रीनाथ की दुल्हनियां’ के लिए तारीफ पा चुके हैं। इस फ़िल्म का इंतजार दर्शकों को बड़ी ही बेताबी से था। हो भी क्यों ना, इस फ़िल्म से दो बड़े नाम जो जुड़े हैं। जाह्नवी कपूर और ईशान खट्टर। ईशान अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन इससे पहले इंटरनेशनल फेम डायरेक्टर माजिद की फ़िल्म ‘बियॉन्ड द क्लाउड’ में कर चुके हैं। जिसके लिए क्रिटिक्स ने उनकी बहुत सरहाना की थी। इस फ़िल्म में भी उन्होंने सरहानीय प्रदर्शन ही किया हैं। दूसरी तरफ जाह्नवी भी अपने रोल में दमदार लगी है और साथ ही बहुत खूबसूरत भी दिख रही है।
अब हम आते है फ़िल्म की कहानी पर क्योंकि ये फ़िल्म मराठी फ़िल्म ‘सैराट’ का हिंदी रिमेक है तो कहानी वही हैं थोड़े फेर बदल के साथ, जैसे अंत थोड़ा अलग है। ‘धड़क’ उदयपुर से शुरू होती है, जहाँ के एक दबंग पॉलिटिशियन ठाकुर रतन सिंह (आशुतोष राणा) की बेटी पार्थवी सिंह (जाह्नवी कपूर) को अपने कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के मधुकर बागला (ईशान खट्टर) से प्यार हो जाता है। जो कि रतन सिंह को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होता क्योंकि वो राज घराने से होते हैैं। जिस तरह सैराट में वर्गभेद या जातिभेद की बात को खुले और साफ़ तरीके से दिखााया था ‘धड़क’ में उस पर उतने खुले तौर पर बात नहीं की गयी है। यहाँ भी मुद्दा ऑनर किलिंग का ही है। ऑनर के आगे कोई रिश्ता बड़ा नहीं होता इसी चीज को दिखाया गया हैं।
फ़िल्म का छायांकन सुंदर है। संगीत कानों को अच्छा लगता है। इस में भी अजय-अतुल का ही संगीत हैै। संगीत में मराठी टच साफ सुनायी देता हैं। एक बड़े बजट की फ़िल्म की पूरी छाप हैं जो सैराट से एकदम अलग हैं। अंकित बिष्ट और श्रीधर दोस्तों की भूमिका में अच्छे लगेें हैंं। फ़िल्म की कोरियोग्राफी फरहा खान और तुषार कालिया की है। मेरे हिसाब से अगर आप बहुत ज्यादा उमीदों के साथ नहीं जाते हैं तो आपको येे फ़िल्म निराश नहीं करेगी और इसी के साथ मैं इस फ़िल्म को 3 स्टार दे सकती हूँ। तो जाइए अपनी ‘धड़क’ का आनंद लीजिए और उस ज़वानी वाले प्यार की हल्की हल्की बारिश में भीगने का लुफ्त उठाइये😊।