Breathe: into the Shadows

Breathe: into the Shadows वेब सीरीज समीक्षा
3.5* / 5*
  • शैली (Genre) सस्पेंस ड्रामा
  • द्वारा निर्देशित (Directed by) मयंक शर्मा
  • अभिनीत (Starring) अभिषेक बच्चन, अमित साध, नित्या मेनन
  • भाषा (Language) हिंदी
  • एपिसोड संख्या 12 ( 45 to 50 mins/-)
Breathe: into the Shadows आपको एक ऐसी कहानी की दुनिया में ले जाता है जहांं हर लम्हा आप अपनी breath पर काबू पाने में लगे रहते हैं। निर्देशक मयंक शर्मा ने जिस अनूठे ढंग से इस सीरीज में कहानी को प्रस्तुत किया है वह काबिले तारीफ है। उन्होंने एक अलग स्तर अन्य निर्देशकों के लिए तैयार कर दिया है। इस सीरीज की पकड़ आपके दिमाग पर इस कदर असर करती है कि आप कहानी से और उसके किरदारों से अपनेेे आपको पूर्ण रूप से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं और उन्हीं की तरह सोचने का प्रयत्न करना शुरू कर देते हैं। इसका सारा श्रेय कहानी लिखने वालों को और उसको प्रस्तुत करनेे वालों को जाता है।
Breathe: into the Shadows यह बताता है कि एक परिवार अपने बच्चेे को बचानेेे के लिए किस हद तक जा सकता है और किसी की जान लेने से भी परहेज नहीं करता है। अब ये कहां तक सही है ये तो सब के खुद के विवेक पर निर्भर करता है।
ये कहानी है दिल्ली के अविनाश सभरवाल (अभिषेक बच्चन) जो कि एक साइकैटरिस्ट है और उनके परिवार की। उनके परिवार में पत्नी आभा (नित्या मेनन) और 6 वर्ष कि सिया (इवाना कौर) हैं। यह एक संपूर्ण रूप से खुश परिवार है। कहानी में मोड़ तब आता है जब 6 वर्ष की सिया का अपहरण हो जाता है और अविनाश को सिया को बचाने के लिए अपहरणकर्ता कुछ लोगों को मारने के लिए कहता है। इसी बीच कहानी में प्रवेश होता है एक और हीरो कबीर सावंत (अमित साध) का, उनको क्राइम ब्रांच ने इस केस को सुलझाने मेंं लगाया है। सीरीज में बहुत ही जिज्ञासु तरीके से रावण के 10 सिरों को इन हत्याओं से संलग्न किया गया है, जो कि कहानी को और भी रोमांचक बनाता है। अब प्रश्न आतेे हैं
  • सिया का अपहरण किसने किया ?
  • अविनाश अपहरणकर्ता के कहने पर हत्याएं
    करेगा कि नहीं ?
  • कबीर सावंत इस श्रंखला को तोड़ पाएंगे या नहीं ?
  • इस श्रंखला के पीछे रावण के 10 सिरों का क्या संबंध है ?
इन सभी प्रश्नों के उत्तर के लिए आपको सीरीज को देखना पड़ेगा 🙂
अभिनय :-
  • अभिषेक बच्चन :- एक सधा हुआ बेहतरीन अभिनय का प्रदर्शन उन्होंने यहां किया है। वह उस बेचारे पिता को पर्दे पर उतारते हैं जो असहाय है, डरा हुआ है और वह अपने अभिनय के द्वारा आपको उस पिता की भावनाओं से जोड़ देते हैं। जो लोग उनके अभिनय क्षमता को कम आंकते हैं, उनको यह सीरीज अवश्य देखनी चाहिए।
  • अमित साध :- कम शब्दों में या कह सकते है कि बिना कुछ बोले हुए भी जो अपनी बात दूसरों तक पहुंचा दे, इस हुनर को अगर आप देखना चाहते हैं तो आप अमित साध का अभिनय यहां देख सकते हैं। उन्होंने आंखों और चेहरे के हाव भाव से जो खेला है वह प्रशंसा योग्य है। लड़कियां उनकी कायल हुए बिना नहीं रह पाएंगी।
  • नित्या मेनन :- जैसा कि हम सब जानते हैं की नित्या एक बेहतरीन अदाकारा है, तो यहां भी उन्होंने ये साबित किया है और उस मां को बखूबी पर्दे पर उतारा है जिसका बच्चा उससे दूर हो गया है।
सायमी खेर, श्रुति बापना, रेशम श्रीवर्धन, हरिशिकेह जोशी, श्रीकांत वर्मा, प्लाबिता बॉर्थकुर और इवाना कौर ये वो नाम है जिनको आप नजर-अंदाज नहींं कर सकते और जब यह लोग पर्दे पर होते हैं तो भी आप अपनी आंखों को उन पर से नहीं हटा सकते। हर एक व्यक्ति अपने किरदार में जान डाल देता है।
कुल मिलाकर अमेजॉन प्राइम ऐसी सीरीज लेकर आया है जिसकी पकड़ दर्शकों पर अच्छी है और जो उनके दिमाग को काम पर लगा सकता है। वह भी साथ में हर कड़ी को सुलझाने और बुनने में लग जाएंगे। जो काम नहीं करता है वह है इसका 12 एपिसोड में बंटा होना, जिसकी वजह से थोड़ी खींची-खींची लगती है और देखने में 9 घंटे का समय देना पड़ता है और दूसरी चीज अभिषेक बच्चन और नित्या मेनन की केमिस्ट्री जो कि एक पति-पत्नी के रूप में थोड़ी सी फीकी लगती है। इसके अलावा सब कुछ उपयुक्त है और देखने योग्य है।
अब आप अपने परिवार के लिए किस हद तक जा सकते हैं देखिए और निर्णय लीजिए…