कोई किताब पढ़ना कुछ ऐसा है जैसे कि किसी हज़ारों साल पहले रही सभ्यता से संवाद।
मानो मैं यहाँ किताबों के ढेर के बीच बैठ के समझ रही हूँ कि उस समय उस औरत ने अपने चूल्हे में कितनी ज़ोर से फूंक मारी होंगी कि वो सुलग पाया होगा।
या फिर किसी बकरी के मन में क्या चल रहा होगा ठीक देव-बलि दिए जाने से पहले।
या फिर कैसे कोई योद्धा अपने कमर के किस हिस्से में कितनी बड़ी तलवार को किस वार के लिए कस रहा होगा।
मानो मैं यहाँ किताबों के ढेर के बीच बैठ के समझ रही हूँ कि उस समय उस औरत ने अपने चूल्हे में कितनी ज़ोर से फूंक मारी होंगी कि वो सुलग पाया होगा।
या फिर किसी बकरी के मन में क्या चल रहा होगा ठीक देव-बलि दिए जाने से पहले।
या फिर कैसे कोई योद्धा अपने कमर के किस हिस्से में कितनी बड़ी तलवार को किस वार के लिए कस रहा होगा।
ये सब समझने के लिए और इन सब लोगों के साथ तालमेल बिठाने के लिए ये ज़रूरी है कि उन्हें समझा जाए, किताबों की मदद से।
तो आज किससे बात कर रहे हैं आप?
तो कहने का मतलब ये है कि मोबाइल से ध्यान हटाइए
और इन किस्सों, कहानियों की दुनियां में गोते लगाइए….
दिल को सुकून देती है कागज़ो पर लिखी ये लाइनें ।
इनकी खुशबू से किरदार महका करतें हैं ।।