किस्सा चाय का…
जो लोग मुझे सही में जानते हैं,
वो चाय से मेरे रिश्ते को भी मानते है।
वो चाय से मेरे रिश्ते को भी मानते है।
चाय.. चाय नहीं अहसास है,
आम हो कर भी बहुत ख़ास है।
आम हो कर भी बहुत ख़ास है।
मेरा प्यार भी इससे धीरे धीरे पनपा है..
हुआ कुछ यूं कि मेरी मम्मी के हिसाब से मेरा गोरा होना मेरे चाय पीने से ज्यादा जरूरी था और भाई हमारे जमाने में चाय पीने से काले हुआ करते थे 😉🤗
अब मम्मी का ख़ुद का चाय प्रेम इतना प्रगाढ़ है कि हर मर्ज का इलाज़ मानों उसी के पास है।
▪️थक गई हूं तो चाय
▪️मन सही नहीं है तो चाय
▪️कहीं से आते ही… कहीं जाने से पहले…
▪️गर्मी हो या सर्दी …
▪️थक गई हूं तो चाय
▪️मन सही नहीं है तो चाय
▪️कहीं से आते ही… कहीं जाने से पहले…
▪️गर्मी हो या सर्दी …
हर बात बस चाय का बहाना…
अब ये जज़्बा लाज़मी था मुझमें आना ।
अब ये जज़्बा लाज़मी था मुझमें आना ।
मेरा जुड़ाव तो कुछ ऐसे शुरू हुआ
वो कहते है ना कुछ रिश्तों का नमक ही दूरी होता है
तो दूरी ही नज़दीकी का सबब हुई🤗
तो अब आप बताओ अपनी चाय का किस्सा…
कैसे बनी वो आपके जीवन का हिस्सा … 🙂