Human :- without Humanity !

⭐⭐⭐💫 3.5/5

कलाकार  :- शेफाली शाह , कीर्ति कुल्हारी , राम कपूर , इंद्रनील सेनगुप्ता , आदित्य श्रीवास्तव , सीमा बिस्वास और विशाल जेठवा

लेखक  :- मोजेज सिंह और इशानी बनर्जी

निर्देशक  :- विपुल अमृतलाल शाह और मोजेज सिंह

ओटीटी  :- डिज्नी प्लस हॉटस्टार

अवधि  :- 7 to 8 hours

Human होने के लिए जो सबसे पहली शर्त है वह है Humanity का होना, जो कि धीरे-धीरे व्यक्ति विशेष में उसके अपने निजी कारणों से या फिर सामाजिक कारणों की वजह से कहीं ना कहीं विलुप्त सी होती जा रही है। डिजनी प्लस हॉटस्टार की नई सीरीज Human इसी अमानवता भरे वातावरण को, हम सभी लोगों के समक्ष अपने ढंग से प्रस्तुत करती है। यह एक मेडिकल थ्रिलर है, जो डॉक्टर्स और फार्मा कंपनियों का एक नया और खौफनाक पहलू उजागर करती है।  कैसे कुछ लोगों की महत्वाकांक्षा, उनकी सनक बाकी लोगों की जिंदगियों को दांव पर लगा देती है।

वेब सीरीज Human की कहानी हमारे लिए नई है, इसलिए ताजी भी लगती है।  कहानी भोपाल में शुरू होती है, जहां भोपाल गैस कांड (1984)के निशान अभी तक पूरी तरह से गए नहीं हैं और लोग अभी भी उस कांड की वजह से कई बीमारियों से ग्रस्त हैं। जैसे कि हम सब जानते हैं कि कोई भी दवा बाजार में आने से पूर्व कई तरह के प्रयोगों से गुजरती है तब जा कर कहीं बाजार में उतारी जाती है।तो यहां दिखाया गया है कि कैसे दवाओं के ट्रायल को लेकर कंपनियां और डॉक्टर्स मिलकर इसको अपने फायदे के लिए उपयोग कर रहे हैं और गरीब लोगों की जिंदगियों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

कहानी दो डॉक्टर्स के इर्द-गिर्द घूमती है। भोपाल के एक बड़े अस्पताल मंथन की सर्वज्ञाता डॉक्टर गौरी नाथ (शेफाली शाह) और उसी अस्पताल की एक नई डॉक्टर, डॉक्टर सायरा सभरवाल (कीर्ति कुल्हारी)। इन्हीं की जिंदगियों को केंद्र में रखकर दवा ट्रायल्स के नाम पर हो रहे अमानवीय व्यवहार की संरचना को प्रदर्शित किया गया है। कैंपों में गरीब लोगों को बिना बताए उन पर दवा का प्रयोग किया जा रहा है। इंसानों को भी गिनी पिग्स की श्रंखला में ही रख कर उनको भी ट्रायल का अंग बना लिया गया है। पीड़ितों को ना तो मुआवजा दिलाने वाला है कोई और ना ही न्याय।

सभी किरदारों को ग्रे शेड में दिखाया गया है कोई भी पूर्ण रूप से सही नहीं है और सभी किरदारों की अपनी अपनी एक वजह या कहानी है उनका इस तरह का होने की, लेकिन सच यह भी है कि…

जिंदगी सब के साथ सुखद नहीं होती लेकिन जरूरी तो नहीं ना सब खारे ही हो जाएं।

Human के अंदर, मुख्य कहानी के अलावा और भी छोटी-छोटी हर किरदार की अपनी एक कहानी भी है, जो ऐसा प्रदर्शित करती है कि एक साथ बहुत कुछ चल रहा है और जो कभी-कभी हमें मुख्य कहानी से भटका देता है और series को लंबा और धीमा बना देती है। Human की कहानी और किरदारों को ध्यान से देखो तो लगता है, इनको काफी सोच कर और गहराई के साथ लिखा गया है, गूढता पर कार्य किया गया है। किरदारों की बात करें तो शेफाली शाह का किरदार वह स्तंभ है जिस पर पूरी कहानी टिकी हुई है, बाकी सब किरदार इन्हीं के आसपास रचित हैं। यहां मैं एक बात जो विशेष रूप से अंकित करना चाहूंगी वह है, शेफाली शाह की अदाकारी और जो कुछ वह अपनी आंखों के जरिए बयां करती हैं, वहां शब्द और संवादों की जरूरत ही नहीं होती है। गौरी नाथ का किरदार उनसे बेहतर कोई कर ही नहीं सकता था। इसी के साथ नाम आता है, विशाल जेठवा का, आपको series देखते समय एक बार भी एहसास नहीं होगा कि वह acting कर रहे हैं, बहुत ही सहजता के साथ किरदार को निभाया है। अब बात करते हैं कीर्ति कुल्हारी की, एक बार फिर से ईमानदारी के साथ अपना कार्य करती नजर आती हैं।

कुल मिलाकर मोजेज सिंह और इशानी बनर्जी ने एक नई तरह की कहानी को लिखा है जो मेडिकल जगत के एक स्याह पहलू को सामने लाता है जिसको एक बार जरूर देखा जाना चाहिए।इसको देखने के लिए धैर्य और संवेदना दोनों की आवश्यकता है, कहने का तात्पर्य है उपयुक्त समय लेकर देखिएगा।