सफरनामा… Finalist (Mrs Delhi NCR 2020)

मैंने देखा है बंद परों का खुलना
मैंने देखा है कुम्हलाई आंखों का ख्वाब बुनना
मैंने देखा है सिर्फ अपने लिए ही लड़ना
मैंने देखा है खुद के वजूद को आगे रखना
मैंने देखा है अपने नाम को पहचान दिलाने का जज्बा पिरोना
इन बीते 4 दिनों में मैंने वह सब देखा और महसूस किया जो करने में शायद उम्र लग जाती है। अकेले में आप शायद अपने ही पंखों की उड़ान, अपने ही ख्वाबों की धार और अपने हौसलों को ही देख पाते हैं लेकिन जब आप एक ऐसी जगह होते हैं जहां सब के सपनों की दिशा एक ही है लेकिन फिर भी वह एक दूसरे से नहीं लड़ रहे वह सिर्फ और सिर्फ अपने आप को बेहतर और बेहतर और भी बेहतर करने के लिए लड़ रहे हैं।
जब बहुत लोगों की दिशा एक जैसी होती है तो वह शायद एक जैसे लगते हैं, ऐसा मैं सोचा करती थी लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है लोगों की शख्सियत अलग होते हुए भी ख्वाबों की दिशा एक है उनकी डगर एक है, उनकी मंजिल एक है फिर भी वे एक दूसरे से एकदम अलग है।
यहां मैं बात कर रही हूं अपने Mrs Delhi NCR 2020 के Finalist के अनुभव की, उस सफर की, उन चार दिनों की जो मैंने और बाकी प्रतियोगियों ने Glamour Gurgaon की Team के साथ बिताए। कुछ अनुभव जिंदगी आपको खुद ब खुद देती है और कुछ आप चुनते हैं। यह वही चुना गया अनुभव है। कभी-कभी आपके हुनर को आपके आसपास वाले लोग पूरी तरीके से महसूस नहीं कर पाते हैं। इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि आप हुनरमंद नहीं है, जरूरी यह है कि आप उसको पहचाने और वहां जाकर खड़े होने का जज्बा दिखाएं, जहां वह पहचाना जा सकता है।
Mrs Delhi NCR 2020 के ऑडिशन में मैंने इस जज्बे को प्रत्यक्ष रूप से देखा है उन लोगों को देखा है जो अपने हुनर को, अपनी शख्सियत को एक अलग पहचान देना चाहते हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र में कुछ ना कुछ अर्थ पूर्ण कर रहे हैं, फिर भी कुछ और की कोशिश करना चाहते हैं। इसी को तो शायद जिंदगी कहते हैं – बिना रुके, बिना थके निरंतर कुछ ना कुछ करने की चाह में आगे बढ़ते जाना।
कभी-कभी आपको सिर्फ और सिर्फ सही समय पर सही जगह होने की जरूरत होती है और उसके बाद जो कुछ होता है वह अच्छा ही होता है, जिस प्रकार हीरे की कद्र जौहरी को होती है बाकियों के लिए तो वह भी कोयला होता है।
Glamour Gurgaon की Team के पास वो पारखी नज़र थी कि वो उस सजीवता को पहचान कर उसको वो दिशा दे जिसके लिए वो उस मंच पर आकर खड़े हुए हैं। इस pandemic (Corona) की उपस्थिति में इस तरह की प्रतियोगिता का आयोजन करना और लोगों का इस आयोजन में सम्मिलित होना एक उत्साही और क्रांतिकारी ज्जबे का उदाहरण प्रस्तुत करता है। कोई भी बाधा आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती बशर्ते आपकी दिशा सही है, जरूरी है तो सारे नियमों और निर्देशों का बखूबी पालन करना।
बरखा मैम (Barkha Nangia) और अभिषेक सर (Abhishek Nangia) ने ये पूर्ण रूप से सुनिश्चित कराया कि किसी भी प्रतिभागी को कोई असुविधा ना हो और नियमों का भी पूर्ण रूप से पालन किया जाए। इतना बड़ा उत्तरदायित्व लेना और उसको पूर्ण रूप से निभाना एक बहुत बड़ा जिम्मेदारी का कार्य होता है जो की काबिले तारीफ़ ढंग से Glamour Gurgaon की Team द्वारा सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया गया।
कुछ लोग अपने सिर्फ अपने आपको कामयाबी की तरफ ले कर जाते है और कुछ वो रास्ता चुनते है जो दूसरों को कामयाबी की तरफ ले जाते हुए उनको भी कामयाब बनाए। इस बार कुछ लोगों के सपनों की उड़ान मैंने भी देखी और कुछ के सपनों को मुकम्मल होते हुए भी। इस पूरे आयोजन के दौरान जिस आशावादी सोच को मैंने सभी की आंखों में देखा वह बहुत ही प्रगतिशील थी। सभी लोग प्रतियोगी होते हुए भी किसी को नीचा दिखाना या छोटा दिखाने की कोशिश ना करते हुए अपने आप को श्रेष्ठ दिखाने की कोशिश में थे जोकि आज कल के प्रतिस्पर्धा पूर्ण वातावरण में कम ही देखने को मिलता है। इस श्रेष्ठता तक पहुंचने के लिए बहुत आत्मविश्वास और आत्म संयम की जरूरत होती है जो कि वहां आए सभी लोगों में था और यदि कभी किसी निराशा ने हम लोगों को घेरा तो बरखा मैम और बाकी सभी मेंटर्स ने सकारात्मकता बनाए रखने का पूर्ण प्रयास किया।

यहां मैं एक बात अवश्य कहना चाहूंगी कि लोगों का ग्लैमर और फैशन इंडस्ट्री के बारे में एक अलग तरह का दृष्टिकोण है जोकि नकारात्मक है, परंतु कुछ लोगों के नकारात्मक अनुभव को ही आधार बनाकर सभी को उसी कतार में शामिल करना उचित नहीं है। हर जगह हर तरह के लोग होते हैं, कभी कभी आप का चुनाव गलत होता है और कभी कुछ लोग गलत होते हैं जिनकी वजह से यह धारणा बन जाती है। तो कृपया अपने चुनाव को लेकर सजग रहें ताकि इस तरह की धारणाओं को बढ़ावा ना मिले।

हर व्यक्ति अपना आसमां खुद चुनता है और वही उसकी उड़ान को मुकम्मल दिशा मिल पाती है तो किसी भी अवसर को अपने हाथ से मत जाने दो क्योंकि वो अवसर आपको कुछ ना कुछ तो दे कर ही जाएगा। सफलता मिल गई तो ‘ सोने पर सुहागा ‘ नहीं तो अनुुुुभव तो अनमोल मिलेगा ही जो अपने आप में अतुलित है ।
अब बुढ़ापे में किस्से भी तो सुनने है, तो अपने किस्से तो आप ही बुनेंगे ना, तो फिर करो शुरूआत ।